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शनि का विभिन्न भावों में गोचर फल- शनि के किस -किस भाव में होने …

शनि का विभिन्न भावों में गोचर फल- शनि के किस -किस भाव में होने ...

  • शनि का प्रथम भाव में गोचर फल

शनि के लग्न में रहने पर जातक स्वयं पर अधिक ध्यान देते हैं। आपकी दूसरों से बोलचाल, आचार व्यवहार, पर आपका ध्यान केंद्रित होता है। अपने स्वास्थ्य को बेहतर करने के लिए यह बहुत अच्छा समय होता है। आप जीवन के प्रति अधिक गंभीर होते हैं। आपको मानसिक अवसाद होने की संभावना भी रहती है। आप अपने आत्मबल को बेहतर करना चाहते हैं और जीवन में पॉजिटिव सोच लाना चाहते हैं किन्तु उसके लिए आपको दूसरों की सहायता लेनी पड़ती है। इस समय आप जो भी कार्य करते हैं वो आगे चलकर आपके लिए जीवन की आजीविका का साधन भी बन सकता है किन्तु आपको बहुत धैर्य रखना होता है। शनि धीरे धीरे ही सभी कार्य करते हैं अतः धीरज रखना सबसे आवश्यक है।

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शनि का द्वितीय भाव में गोचर

दूसरे भाव में शनि का गोचर जातक को अपने धन और अपने पूर्ण व्यक्तित्व के बारे में सचेत करता है। इस समय आपके आर्थिक हालात अपेक्षा से कम रह सकते हैं। आपको अधिक परिश्रम आपके कार्यक्षेत्र में करना पड़ सकता है। लाभ अथवा कमाई कम रह सकती किन्तु स्थिर होती है और अचानक नुक्सान की घटना बहुत ही कम होती है। इस गोचर में आपको अपनी वास्विक स्थिति का भान होता है और अपनी काल्पनिक छवि से से आप बाहर निकलते हैं। यह बहुत अच्छा समय होता है जब आप अपनी योग्यताओं को अपनी धनार्जन की युक्तियों में उपयोग कर सकते हैं।

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शनि का तृतीय भाव में गोचर फल

तीसरे घर में शनि के आने से आपकी दूसरों से संवाद की शैली, प्रयोजन, लाभ आदि पर केंद्रित होती है और आप अपनी बुद्धि, मस्तिष्क का अधिकाधिक प्रयोग करना चाहते हैं जिस से आपको आर्थिक लाभ हो। ऐसा संभव हो सकता है की आपको लगने लगे की आपको आपके रिश्तेदारों द्वारा उचित तवज्जो नहीं दी जा रही है और वे लोग आपकी उन्नति में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं और आपके सम्बन्ध ख़राब हो सकते हैं। आपमें इस समय बेकार की बातों के लिए समय नहीं होता और आप अपना समय कुछ सीखने में लगा सकता हैं। आप अपने समय को अधिक उपयोग में लेना चाहेंगे और इस तरह व्यवस्थित करने का प्रयास करेंगे की बेकार की बातों में आपका समय नष्ट न हो।

शनि का चतुर्थ भाव में गोचर फल

शनि का चतुर्थ में गोचर आपके अंतर्मन में काफी हलचल दे सकता है किन्तु ऐसा आवश्यक नहीं है। किन्तु जब शनि अगले घर में अर्थात पंचम भाव में जाएगा तब तक आप अपने जीवन में स्पष्ट बदलाव देख चुके होंगे और जीवन के कुछ ज़रूरी निर्णय भी ले चुके होंगे। आमतौर पर शनि का चतुर्थ भाव से गोचर अच्छा नहीं होता है और इसका लाभ यह होता है की आपका अहंकार काफी हद तक नष्ट होता है और आप एक उन्नत व्यक्ति बन सकते हैं। आप अपना घर तो बदल ही सकते नहीं, परिवार से अलग होना का भी चांस रहता है। अकेलेपन की भावना आपके अंदर घर कर सकती है। आपके करियर में ठहराव भी आप महसूस कर सकते हैं।

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शनि का पंचम भाव में गोचर फल

शनि का पंचम में गोचर आपको काफी समस्या दे सकता है। आपको अपनी कलात्मकता की क़ाबलियत को लेकर संदेह होता है और नए विचारों का अभाव महसूस कर सकते हैं। आपके अहम को काफी ठेस पहुँचती है। आपके मनोरंजन और आपके काम के बीच में एक तनाव जन्म ले सकता है और आप अपनी मनोरंजन को काफी सीमित कर सकते हैं। आप काफी उपेक्षित महसूस कर सकते हैं, आपके चाहने वालों से, आपको ऐसा लग सकता है आपके ऊपर बराबर ध्यान नहीं दिया जा रहा है और आपको वो प्रेम नहीं प्राप्त हो रहा है जिसके आप हकदार हैं। यह गोचर आपको अपने बारे में अधिक जागरूक करेगा और आप स्वयं के प्रति अधिक सचेत रहेंगे। दूसरे आपके बारे में क्या सोचते हैं यह विचार आपको परेशान करना बंद कर देगा और आप अधिक उन्मुक्त होंगे।

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शनि का छठे भाव में गोचर फल

शनि छठे भाव में आने के बाद आपकी रोज़मर्रा की दिनचर्या में परिवर्तन लाते हैं। आपको अपने स्वास्थ्य, काम काज, रोज़ के काम आदि में थोड़ा तनाव महसूस होगा और आप उसको व्यवस्थित करने का प्रयास करेंगे। शुरुआत में आपको लगेगा की आपके ऊपर काम का बहुत बोझ है और आप थोड़ी खीज भी महसूस करेंगे किन्तु बाद में आपको ही उसका लाभ होगा। आपके समय का उचित उपयोग क्या होना चहिये – इस बात पर आप काफी चिंतन कर सकते हैं। आपके स्वास्थ्य के लिए क्या सबसे बेहतर हो सकता है यह भी आपको इस समय में करना होगा और स्वास्थ्य लाभ लेना होगा। शनि आपके जीवन की वो कपोल कल्पनाएं जिनमें आपका अहंकार पोषित होता है उनको हटा देता है और वास्तविकता को आपके सामने रखता है। आपका लक्ष्य ही आपका ध्येय बन जाये ऐसी प्रेरणा आपके अंदर आ सकती है।

शनि का सप्तम भाव में गोचर फल

सप्तम भाव से शनि का गोचर बहुत महत्त्वपूर्ण होता है क्योंकि यह भाव ही मनुष्य के महत्त्वपूर्ण बातों का होता है। विवाहित लोगों को अपने संबंधों में खिंचाव महसूस हो सकता है। आपके बीच में कोई निर्णायक स्थिति बन सकती है। मन में आपसी संबंधों को लेकर अप्रसन्नता या खिन्नता रह सकती है। आपकी मित्रता अथवा व्यापारिक सम्बन्ध कैसे रहेंगे और कैसे रहने चाहिए यह सब आप इस गोचर के समय में सोचते विचारते हैं। जो लोग अकेले हैं उनको अकेलापन महसूस हो सकता है। शनि मन में अकेलापन, खिन्नता, चिढचिढापन देने वाला ग्रह है और इस गोचर में यह पूर्ण रूप से इस क्रिया को अंजाम देने में व्यस्त रहता है। इस समय आप किसी सम्बन्ध को बनाते हैं तो बहुत सम्भावना रहती है की वह एक लंबा समय तक चलने वाला सम्बन्ध बनेगा।

शनि का अष्टम में गोचर फल

शनि का अष्टम में गोचर होने पर आपके मन में अपनी अनेकानेक छुपी हुई इच्छाओं वासनाओं के बारे में आप सजग होते हैं, अपनी अनैतिक गतिविधियों को लेकर आपका अंतर्मन आपको झकझोर सकता है। अपनी सेक्स लाइफ, फिनान्सस आदि को लेकर आप अधिक जागरूक होते हैं और इन सबको रेकालीबिरेट करने की कोशिश कर सकते हैं। आपकी सेक्स शक्ति का कुछ ह्रास भी हो सकता है और यह भे संभव है की आपकी सेक्स की इच्छा कम हो जाए या कुछ समय के लिए लुप्त हो जाये। काफी लोगों को धन को लेकर समस्या हो सकती है। आप अपने किसी डर से निजात पा सकते हैं, किसी अन्धविश्वास को तिलांजलि दे सकते हैं।

शनि का नवम भाव में गोचर फल

शनि का नवम भाव से गोचर आपको स्वयं को अनुशासन में लाने के लिए एक अच्छा समय होता है। बहुत सी ऐसी बातें जिनके बारे में हम सोचते आये थे की इनका बहुत महत्त्व है उनकी असलियत हमारे सामने आ सकती है और हमारा भ्रम टूट सकता है। यदि आप कोई अध्ययन कर रहे हैं तो स्वयं से आपको यह ज़रूर पूछना चहिये की क्या वात्सव में आपको यह अध्यययन करना चाहिए की नहीं। आपको धर्म को लेकर नयी जिज्ञासा होने की संभावना भी होती है। अंधभक्ति को आप नमस्ते कर सकते हैं। आपके सम्बन्ध आपके गुरु, पिता आदि से खराब हो सकते हैं किन्तु बाद में आपको ही स्वयं की गलती पता चलेगी और आप सही मार्ग पकड़ेंगे।

शनि का दशम में गोचर फल

शनि का दशम में गोचर आपको काफी प्रभावित कर सकता है। शनि का इस भाव से गोचर जातक को उसकी असल काबिलियत का एहसास कराता है और साथ ही जातक के मन में बनी हुई स्वयं के पोटेंशियल की छवि को भी सामने रख देता है। इस समय जातक को अपने करियर अथवा व्यवसाय में परेशानिया भी आती हैं और उसके कामों में अनावश्यक देरी भी होती है किन्तु यह सब इसलिए होता है की जिससे जातक को अपनी ऊर्जा का पूर्ण आभास हो जाये। जो कि आगे चल कर होता भी है। यह गोचर जातक को आम तौर पर उसकी काबिलियत के अनुसार स्थापित करने में बहुत लाभकारी होता है।

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शनि का लाभ स्थान में गोचर फल

लाभ स्थान में शनि के आने पर कई घटनाएं होती हैं। इस समय जातक को मन में यह प्रश्न आता है की जो मैं कर रहा हूँ वह किसलिए है और आगे मुझे क्या करना है। दूसरों के साथ कैसे सम्बन्ध रखने हैं और किस से कैसा व्यवहार रखना है, किस व्यक्ति से क्या काम लेना है है किसका नहीं यह सब जातक इस गोचर में अधिक सोचता है। यह भी संभव है कि जातक को ऐसा लगे की उसके मित्र और पहचान के लोग उसके साथ उतना नहीं हैं जितना वह सोच रहा है और इस कारण उसका मन कुछ खिन्न हो सकता है। जातक किसी समूह का सदस्य आदि बन सकता है। वह बहुत ही सेल्फ सेंटर्ड भी हो सकता है।

शनि का द्वादश भाव में गोचर फल

आत्मावलोकन के लिए इस से बढ़िया समय नहीं होता है। अपने जीवन की सफलताओं, असफलताओं, सुख, दुःख के बारे में सोचना और आगे के लिए प्लान करना इस गोचर का ध्येय होता है। सभी के मन में कई बातें उठती रहती हैं और पीछे कहीं दब जाती हैं। इस समय उन बातों को सोचने और काम की बातों को अपना लेने और बेकार की बातों को हटा देने के लिए होता है। यह समय अधिकतर पुराने पन्नों को बंद कर देने का होता है। स्वास्थ्य को लेकर समस्या भी इस समय आ सकती है। मनोवैज्ञानिक रोग भी हो सकते हैं। मनोविज्ञान, अंतर्ज्ञान आदि विषयों को पढ़ने और जानने की इच्छा भी इस समय में हो सकती है।

Por Acharya Raman

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