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फिरोज़ा रत्न के बारे में यह नहीं जानते होंगे आप

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फिरोजा की उत्पत्ति – फिरोज़ा रत्न गुरु ग्रह का उपरत्न होता है, यह मूल रूप से 16 वीं सदी के आसपास (फ्रेंच भाषा) तुर्की में पाया गया था। इसके अलावा यह दक्षिण ऑस्ट्रेलिया, चीन, ब्राजील, मेक्सिको, संयुक्त राज्य अमरीका, इंग्लैंड, बेल्जियम और भी बहुत सारी जगह से प्राप्त होता है।

यह नीले और हरे -नीले रंग का सेमीप्रीसियस स्‍टोन होता है लेकिन सबसे अच्छा रंग आसमानी नीला ही माना जाता है।जिस व्यक्ति की कुंडली में बृहस्पति और शनि ग्रह कमजोर हो, उन्हें यह रत्न धारण करना चाहिए। यह बृहस्पति और शनि ग्रह को मजबूती प्रदान करता है।

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आंतरिक शक्ति का संचार

गुरु का ये रत्‍न धारण करने से आपके अंदर आंतरिक शक्ति का संचार होता है। आप स्वयं को आत्‍मविश्‍वास से भरपूर महसूस करते हैं। अगर किसी व्‍यक्‍ति में आत्‍मविश्‍वास की कमी है तो उसे फिरोजा रत्‍न जरूर धारण करना चाहिए। इसके प्रभाव से विचारों में सकारात्मकता आती है।

प्रेम को बढ़ाने वाला

यदि पति-पत्नी में कोई अनबन हो या प्रेमी-प्रेमिका के बीच परेशानी चल रही हो तो फिरोजा रत्न की दो अंगूठियां बनवाएं और शुभ मुहूर्त में एक-दूसरे को पहनाने से परस्पर संबंधो में मधुरता आती है।

फिरोजा और फैशन की दुनिया

यह रत्न केवल एस्ट्रोलॉजी की दुनिया में ही नहीं बल्कि फैशन और आभूषण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण माना जाता है, महिलाओं को इस रत्न से बने हुए आभूषण अपनी तरफ आकर्षित करते है और उनकी खूबसूरती में यह रत्न चार चाँद लगा देता है। यह रत्न आसानी से बाज़ार में उपलब्ध है परन्तु मूल और प्राचीन फिरोज़ा को प्राप्त करना थोडा कठिन होता है। यह देखने में बहुत ही सुंदर होता है। इसमे आकर्षण शक्ति होती है। फैशन की दुनिया में इसका अत्यधिक महत्व है।

आंखों की रोशनी बढ़ती है

फिरोजा रत्‍न पहनने से आंखों को आराम मिलता है। यह रत्‍न आंखों की रोशनी बढ़ाने में भी मदद करता है। तो अगर आपको नेत्र संबंधी कोई भी परेशानी या समस्‍या है तो आपको फिरोजा रत्‍न पहनने से जरूर फायदा होगा।

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फिरोजा रत्न से बीमारी का इलाज

इस रत्न के प्रभाव से हृदय, गुर्दे से सम्बंधित बीमारी में फायदा होता है, जिन्हें रक्तचाप (उच्च या कम) जैसी कोई भी दिक्कत रहती हो और उसका इलाज सफल नहीं हो रहा है, उन्हें भी ज्योतिष सलाह लेने के बाद फिरोजा रत्न धारण करना चाहिए । इसके अलावा कई तरह की बीमारी को काटने में यह रत्न मददगार सिद्ध होता है।

फिरोजा एक फायदे अनेक

  • अगर सगे-संबंधी या मित्रों के साथ किसी बात को लेकर अनबन हो रही है तो फिरोजा किसी भी रूप में भेट करने पर रिश्तों में सुधार होता है।
  • इसके प्रभाव से मान-सम्मान में वृद्धी होती है, कामकाज में धन-लाभ होता है।
  • छात्रों के लिए यह रत्न बहुत ही लाभदायक होता है, इसे धारण करने से बौद्धिक क्षमता का विकास होता है तथा स्मरणशक्ति बढ़ती है।
  • भूत-प्रेत, जादू टोना जैसी बुरी शक्तियों से यह रत्न हमारा बचाव करता है।

किसे धारण करणा चाहिए

फिरोजा उपरत्न होने के बावजूद भी काफी असरदार रत्न है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार धनु, मीन और कुम्भ राशि के लोगों को यह रत्न अवश्य धारण करना चाहिए। इसके अलवा अन्य राशि के लोग भी इसे धारण कर सकते है, पश्‍च‍िमी ज्‍योतिष के अनुसार फिरोजा (टरक्‍वाइज) धनु राशि के लोगों का बर्थ स्‍टोन है।

कब और कैसे धारण करे

फिरोज़ा रत्न बृहस्पति या शनिवार के दिन या किसी शुभ दिन गुरु या शनि की होरा में पहनना चाहिए ताकि पहनने वाले को इसका लाभ मिल सके लेकिन इससे पहले अंगूठी को कच्चे दूध व गंगाजल के मिश्रण में थोड़ी देर डुबोए रखें ताकि वह। हो जाए इसके बाद पूजा-अर्चना करने पर ही अंगूठी धारण करनी चाहिए। इस रत्न को आप चांदी या पंच धातु में बनवाकर धारण कर सकते हैं। याद रखे कि अंगूठी या ब्रेसलेट या लॉकेट मे फिरोजा कम से कम सवा पांच रत्ती से आठ रत्ती का अवश्य होना चाहिये।

कहाँ से लें

उच्‍च क्‍वालिटी का फिरोजा रत्‍न आप AstroVidhi से ऑनलाइन भी मंगवा सकते हैं। रत्‍न पहनने का तभी लाभ होता है जब रत्‍न certificado हो यानि उच्‍च क्‍वालिटी का हो। फिरोज़ा रत्न से जडित अंगूठी, ब्रेसलेट, लॉकेट हमारे अनुभवी ज्योतिषी द्वारा अभिमंत्रित किया है जिससे यह आपको जल्द ही शुभ फल दे। इस रत्न के साथ सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा जो इस रत्न के ओरिजनल होने का प्रमाण है।

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किसी भी जानकारी के लिए Llamada करें: 8882540540

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