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पुखराज दूर करता है गरीबी और दिलाता है मान सम्मान |

पुखराज दूर करता है गरीबी और दिलाता है मान सम्मान |

पुखराज एक चमकदार रत्न है। यह लगभग जितने पुष्प है उतने रंगो में उपलब्ध है इसका दुसरा नाम पुष्पराज भी है। यह पंच महारत्नो की संज्ञा में आता है, लेकिन मेरी नजर में तो इसका नाम रत्न राज होना चाहिये। नही मैं अतिशयोक्ति पूर्ण बात नही कर रहा हूँ। पुखराज के गुणो को जानने के बाद आपको मेरी बातों में अतिशयोक्ति बिल्कुल नहीं झलकेगी। पुखराज जितना सुंदर है उतना ही लाभदायक भी है। शास्त्रो में तथा अलग- अलग ग्रन्थो में पुखराज के महत्व बताये गये हैं –

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1. भाग्य वृद्धि – पुखराज गुरु ग्रह का रत्न है तथा गुरु को कालपुरुष के नवम स्थान का कारक कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र में नवम भाव को भाग्य स्थान की संज्ञा प्राप्त है। पुखराज के प्रयोग से गुरु के दोषो को दूर कर भाग्य वृद्धि की जा सकती है। यह भाग्य बढाने वाला रत्न हैं।

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2. दरिद्र्ता नाशक या कर्जमुक्ति- पुखराज पांच रत्नों में प्रमुख स्थान रखता है। पुखराज को स्वर्ण में धारण किया जाता है। शास्त्रों में उल्लेखित है की जहां पंचरत्न में से कोई रत्न विधमान है या स्वर्ण का वास है वहां दरिद्रता कभी वास नही करती।

3. शिक्षा सम्बंधित दिक्कतें- जिस जातक की कुंडली में गुरु पीडीत अवस्था में हो उस जातक को शिक्षा सम्बंधी अनेक दिक्कतों का सामना करना पडता है। पुखराज गुरु के दोषों को दूर करने में सक्षम है।

4. कन्या विवाह- जिस कन्या का विवाह न हो रहा हो उसे पुखराज स्वर्ण में पहनाकर भगवान विष्णु का पूजन करना चाहिये। कन्या विवाह सम्बंधी समस्यायें तुरन्त दूर हो जाती है।

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5. मान सम्मान में वृद्धि- पुखराज का धारण करना मान सम्मान में वृद्धि करता है।

6. सन्तान सम्बंधि दिक्क्ते- ज्योतिष शास्त्र में नियम है की जब कारक व भाव का स्वामी पीडित हो तो संतान नही होती। पुखराज में पुरुषत्व के वे गुण विधमान है जो की संतान की प्राप्ती के लिये आवश्यक है। अत: गर्भ पात की समस्या बार बार आ रही हो या किसी और कारण गर्भ हानि हो रही हो तो पुखराज धारण लाभ दायक होता है।

7. जटिल रोग या बिमारियां नाशक- जिन रोगों का बार बार डॉक्टरी उपाय करने पर भी लाभ नही मिल पा रहा हो या दवाईयां काम न कर रही हो तो उन रोगों की शांति के लिये पुखराज धारण करना लाभदायक होता है। ध्यान रखे बीमारियों से बचने के लिये किसी कुशल ज्योतिषी से अवश्य मिलें।

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8. नजर या उपरी बाधा नाशक- यह रत्न गुरु का है तथा सबसे पवित्र माना जाता है।

9. व्यसन या दुर्मति नाशक- धार्मिकता की और ले जाने वाले इस रत्न को धारण करने से व्यसन धीरे धीरे लुप्त हो जाते हैं।

10. पैतृक सम्पति- गुरु का प्रभाव व्यक्ति को सज्जन बनाता है साथ ही पिता और गुरु की सेवा करने वाला बनाता है। इस रत्न को धारण करने से जातक का पिता जातक से प्रसन्न रहता है।

11. विष नाशक – पुखराज के अन्दर अनेक ऐसे गुण विधमान है जो की विष को शांत करता है। व्यक्ति पर विष प्रयोग होने से पहले पुखराज का रंग फीका पडना शुरु हो जाता है।

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