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जानें दशहरे के दिन शमी वृक्ष की पूजा का क्या है ख़ास महत्व

dushehra ki puja

भारतीय संस्कृति में हर त्यौहार का अपना एक अलग और ख़ास महत्व है और हर त्यौहार अपने साथ बेहतर जीवन जीने का एक अलग सन्देश देता है। उनमे से एक है दशहरा इस दिन शमी वृक्ष की पूजा का ख़ास महत्व है। घर आँगन में पेड़ पौधे लगाना और उनकी देखभाल करना हमारे हिन्दू धर्म की बहुत प्राचीन परंपरा है। धार्मिक नजरिये से देखा जाए तो कई पेड़ बहुत ही महत्वपूर्ण माने गये है, इनमे औषधीय गुणों के साथ साथ भगवान का आशीर्वाद भी होता है। शमी का वृक्ष भी ऐसे ही वृक्षों में शामिल है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर में शमी का पेड़ लगाने से देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है। शमी का वृक्ष शनि के प्रकोप से भी बचाता है।

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क्या है पौराणिक मान्यता

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार दशहरे पर शमी के वृक्ष की पूजन की परंपरा हमारे यहाँ प्राचीन समय से चली आ रही है। ऐसी मान्यता है की मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम जी ने शमी वृक्ष के सामने शिश नवाकर पूजा अर्चना की थी और अपनी विजय की प्रार्थना की थी इसलिए इस वृक्ष को बहुत ही पवित्र तथा मंगलकारी माना गया है। दशहरे की दिन शमी वृक्ष का पूजन जल और अक्षत के साथ किया जाता है। नवरात्रि के पावन पर्व पर भी माँ दुर्गा का पूजन शमी वृक्ष के पत्तों से करने का विधान है। गणेश जी और शनिदेव दोनों को ही शमी बहुत प्रिय है। कहते है शमी का वृक्ष घर के ईशान कोण में लगाना सबसे उत्तम होता है, इसमें प्राकृतिक तौर पर अग्नि तत्व पाया जाता है।

शमी वृक्ष तेजस्विता एवं साहस का प्रतीक है जिसमे अग्नि तत्व की मात्रा होती है, इसी कारण यज्ञ में अग्नि प्रकट करने हेतु शमी की लकड़ी के उपकरण बनायें जाते है। महाभारत काल में भी पांडवों ने देश निकाला के अंतिम वर्षों में हथियार शमी वृक्ष में ही छिपायें थे, और इन्ही हथियारों से कौरवों पर विजय हासिल की थी इसलिए भी इस वृक्ष की मान्यता है।

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शनि ग्रह और शमी वृक्ष का सम्बन्ध

शनि ग्रह न्याय करने वाला ग्रह है, इसलिए इसे न्याय का देवता कहा जाता है। शनि को काला रंग, सरसों का तेल और काली उड़द अतिप्रिय है साथ ही साथ शमी का वृक्ष भी प्रिय है। हम जो भी अच्छे-बुरे कर्म करते है उसके पीछे शनि देव का हाथ होता है। यदि किसी जातक की कुंडली में शनि अच्छे भाव में बैठे है तो जातक ऊँचाइयों को छू लेता है, इसके विपरीत अगर शनि बुरे भाव में बैठे है तो जातक को दरिद्रता में जीवनयापन करने के लिए मजबूर कर देते है। शमी के पेड़ की पूजा करने से शनि देव प्रसन्न हो जाते है और शनि देव का आशीर्वाद जातक के साथ सदैव बना रहता है। शनिदेव की टेढ़ी नजर से रक्षा करने के लिए शमी के पौधे को घर में लगाकर उसकी पूजा करनी चाहिए। शनि के कोप से यह पवित्र वृक्ष हमारी रक्षा करता है।

होती है मनोकामनायें पूर्ण

  • इस वृक्ष में देवता निवास करते है, इसलिए देवताओं का आशीर्वाद जातक को मिलता है और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
  • नकारात्मक शक्तियों का नाश करने के लिए, तंत्र-मन्त्र तथा यज्ञों में इस वृक्ष का प्रयोग किया जाता है।
  • दशहरे के दिन कई राज्यों में इसे एक-दूसरे को भेंट के रूप में देते है और एक दूसरे के साथ मधुर संबंधों की कामना करते है।
  • शमी के वृक्ष को आयुर्वेद में बहुत ही गुणकारी माना गया है, इस वृक्ष के विभिन्न अंगों का इस्तेमाल इलाज के तौर पर किया जाता है जिसके फल स्वरुप स्वाथ्य ठीक रहता है।
  • शमी के फूल, पत्ते, टहनिया और रस का प्रयोग भी शनि के दोषों से मुक्ति पाने के लिए किया जाता है, शनि देव मनवांछित फल देते है।

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