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इस शुभ मुहूर्त में करें होलिका दहन का पूजन, इस दिन पड़ रहा है …

इस शुभ मुहूर्त में करें होलिका दहन का पूजन, इस दिन पड़ रहा है ...

हिंदू धर्म में होली का त्‍योहार बहुत खास माना जाता है। इस त्‍योहार के महत्‍व को आप इसी बात से जान सकते हैं कि इसे स्‍वयं भगवान कृष्‍ण अपनी प्रिय राधा के साथ मनाते थे। फाल्‍गुन मास की पहली पूर्णिमा को होली का त्‍योहार मनाया जाता है। होली का पर्व 2 दिन मनाया जाता है। इसके पहले दिन होलिका दहन किया जाता है और दूसरे दिन एक-दूसरे को रंगों से रंगकर इस पर्व पर खुशियां मनाई जाती हैं।

कब है होली का त्‍योहार

इस बार होली का त्‍योहार 1 मार्च यानि गुरुवार के दिन पड़ रही है। वहीं होलिका दहन 1 मार्च को पड़ रहा है।

होली के शुभ मुहूर्त

होलिका दहन मुहूर्त: 18,16 से 20,47 तक

भद्रा पूंछ: 15,54 से 16,58 तक

भद्रा मुख: 16,58 से 18,45 तक

रंग वाली होली: 2 मार्च, 2018

होलिका दहन: 1 मार्च, 2018

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 08.57 (1 मार्च)

पूर्णिमा तिथि समाप्‍त: 06.21 (2 मार्च)

होलिका दहन का महत्‍व

रंगों वाली होली से एक दिन पूर्व होलिका दहन किया जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्‍छाई की जीत का प्रतीक है। होलिका दहन की अग्नि में हिरण्‍यकश्‍यप की बहन होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर बैठी थी। बुराई का प्रतीक होलिका इसमें जल कर खाक हो गई थी जबकि अच्‍छाई का प्रतीक प्रह्लाद बच गया था।

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पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा हिरण्‍यकश्‍यप बहुत अभिमानी राजा था और वो स्‍वयं को ही भगवान समझता था। उसे अपने पुत्र का भगवान विष्‍णु की पूजा करना बिलकुल भी पसंद नहीं था। भगवान विष्‍णु के प्रति अपने पुत्र की भक्‍ति से नाराज़ होकर हिरण्‍यकश्‍यप ने प्रह्लाद को कई तरह की सज़ाएं दीं जिनसे कभी भी प्रह्लाद को कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

हिरण्‍यकश्‍यप की बहन होलिका ने प्रह्लाद की मृत्‍यु के लिए एक योजना बनाई जिसके तहत वो प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्‍नि में बैठी। होलिका एक पास एक ऐसा कपड़ा था जिसे ओढ़ने के बाद उसे आग से किसी तरह का कोई नुकसान नहीं पहुंचता। वहीं दूसरी ओर खुद को बचाने के लिए प्रह्लाद के पास कुछ भी नहीं था। प्रह्लाद, भगवान विष्‍णु का नाम जपने लगा और विष्‍णु जी की कृपा से प्रह्लाद अग्नि में जलने से बच गया था। इसी तरह प्रह्लाद की जान बच गई और होलिका इस अग्‍नि में जलकर मर गई। इसी वजह से होली का त्‍योहार बुराई पर अच्‍छाई की जीत का प्रतीक है।

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कैसे होता है होलिका दहन

होलिका के शुभ मुहूर्त में शाम के समय लोग अपने दोस्‍तों और परिवार के सदस्‍यों के साथ मिलकर अलाव जलाते हैं और सुख-शांति की प्रार्थना करते हैं। इस पवित्र अग्‍नि में जौ को भूनकर अपने प्रियजनों के बीच बांटा जाता है। मान्‍यता है कि आग में जौ जलाने से सभी तरह के दुख और समस्‍याएं दूर हो जाती हैं और जीवन में सकारात्‍मकता आती है। उत्तर भारत में विशेष रूप से होलिका दहन की पूजा की जाती है।

किसी भी जानकारी के लिए Llamada करें: 8882540540

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